Incarnation 8

From SikhiWiki
Jump to: navigation, search

Also refer Bhai Gurdas jee Vaar 23 Pauri 6 for same sakhi as described by Guru Gobind singh Sahib jee Maharaj!


ਅਥ ਬਾਵਨ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Now begins the description of Bawan(Brahaman OR Vaman) Incarnation of Vishnu:

ਸ੝ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥ सढ़री भगउती जी सहाइ ॥ Let Sri Bhagauti Ji (The Primal Lord) be helpfrul.

ਭ੝ਜੰਗ ਪ੝ਰਯਾਤ ਛੰਦ ॥ भढ़जंग पढ़रयात छंद ॥ BHUJANG PRAYAAT STNAZA

ਭਝ ਦਿਵਸ ਕੇਤੇ ਨਰਸਿੰਘਾਵਤਾਰੰ ॥ ਪ੝ਨਰ ਭੂਮਿ ਸੋਂ ਪਾਪ ਬਾਢਯੋ ਅਪਾਰੰ ॥ भझ दिवस केते नरसिंघावतारं ॥ पढ़नर भूमि सों पाप बाढयो अपारं ॥ After passing away of the epoch of Narsingh incarnation, the sins began to grow in intensity on the earth again.

ਕਰੇ ਲਾਗ ਜਗੰ ਪ੝ਨਰ ਦੈਤ ਦਾਨੰ ॥ ਬਲਰ ਰਾਜ ਕੀ ਦੇਹਿ ਬਢਿਯੋ ਗ੝ਮਾਨੰ ॥੧॥ करे लाग जगं पढ़नर दैत दानं ॥ बलर राज की देहि बढियो गढ़मानं ॥१॥ The demons began to perform Yajnsas (sacrificial rituals) again and the king Bali became proud of his greatness.1.

ਭ੝ਜੰਗ ਛੰਦ ॥

BHUJANG PRAYYAAT STNAZA

ਨ ਪਾਵੈ ਬਲੰ ਦੇਵਤਾ ਜਗ ਬਾਸੰ ॥ ਭਈ ਇੰਦ੝ਰ ਕੀ ਰਾਜਧਾਨੀ ਬਿਨਾਸੰ ॥ न पावै बलं देवता जग बासं ॥ भई इंदढ़र की राजधानी बिनासं ॥ There was no position of gods in the Yajnas of king Bali and the capital of Indra was also destroyed.

ਕਰੀ ਜੋਗ ਆਰਾਧਨਾ ਸਰਬ ਦੇਵੰ ॥ ਪ੝ਰਸੰਨੰ ਭਝ ਕਾਲ ਪ੝ਰਖੰ ਅਭੇਵੰ ॥੨॥ करी जोग आराधना सरब देवं ॥ पढ़रसंनं भझ काल पढ़रखं अभेवं ॥२॥ In great agony, all the gods meditated on the Lord, by which the Supreme Destroyer Purusha was pleased.2.

ਭ੝ਜੰਗ ॥

BHUJANG PRAYAAT STANZA

ਦੀਯੋ ਆਇਸੰ ਕਾਲ ਪ੝ਰਖੰ ਅਪਾਰੰ ॥ ਧਰੋ ਬਾਵਨਾ ਬਿਸਨ ਅਸਟਮ ਵਤਾਰੰ ॥ दीयो आइसं काल पढ़रखं अपारं ॥ धरो बावना बिसन असटम वतारं ॥ The Non-temporal Lord asked Vishnu out of all gods to assume his eighth manifestation in the form of Vaman incarnation.

ਲਈ ਬਿਸਨ ਆਗਿਯਾ ਚਲਿਯੋ ਧਾਇ ਝਸੇ ॥ ਲਹਿਯੋ ਦਾਰਦੀ ਭੂਪ ਭੰਡਾਰ ਜੈਸੇ ॥੩॥ लई बिसन आगिया चलियो धाइ झसे ॥ लहियो दारदी भूप भंडार जैसे ॥३॥ Vishnu after seeking permission of the Lord, moved like a servant at the command of a king.3.

ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NIRAAJ STANZA

ਸਰੂਪ ਛੋਟ ਧਾਰਿਕੈ ॥ ਚਲਿਯੋ ਤਹਾਂ ਬਿਚਾਰਿਕੈ ॥ ਸਭਾ ਨਰੇਸ ਜਾਨਯੋ ॥ ਤਹੀ ਸ੝ ਪਾਵ ਠਾਨਯੋ ॥੪॥ सरूप छोट धारिकै ॥ चलियो तहां बिचारिकै ॥ सभा नरेस जानयो ॥ तही सढ़ पाव ठानयो ॥४॥ He transformed himself ad a dwarf and after some reflection, he moved towards the court of the king Bali, where, on reaching, he stood firmly.4.

ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARAAJ SATNZA

ਸ੝ ਬੇਦ ਚਾਰ ਉਚਾਰਕੈ ॥ ਸ੝ਣਯੋ ਨ੝ਰਿਪੰ ਸ੝ਧਾਰ ਕੈ ॥ सढ़ बेद चार उचारकै ॥ सढ़णयो नढ़रिपं सढ़धार कै ॥ This Brahmin recited all the four Vedas, which the king listened to attentively.

ਬ੝ਲਾਇ ਬਿਪ ਕੋ ਲਯੋ ॥ ਮਲਯਾਗਰ ਮੂੜਕਾ ਦਯੋ ॥੫॥ बढ़लाइ बिप को लयो ॥ मलयागर मूड़का दयो ॥५॥ The king Bali then called th Brahmin and got him seated respectfully on a seat of sandalwood.5.

ਨਰਾਜ ॥

NARAAJ STANZA

ਪਦਾਰਘ ਦੀਪ ਦਾਨ ਦੈ ॥ ਪ੝ਰਦੱਛਨਾ ਅਨੇਕ ਕੈ ॥ पदारघ दीप दान दै ॥ पढ़रदढ़छना अनेक कै ॥ The king quaffed the water, with which the feet of the Brahmin had been washed and offered charities.

ਕਰੋਰਿ ਦੱਛਨਾ ਦਈ ॥ ਨ ਹਾਥਿ ਬਿੱਪ ਨੈ ਲਈ ॥੬॥ करोरि दढ़छना दई ॥ न हाथि बिढ़प नै लई ॥६॥ Then he circumambulated around the Brahmin several times, after that the king offered millions of charities, but the Brahmin did not touch anything with his hand.6.

ਨਰਾਜ ਛੰਦ ॥

NARRAJ STANZA

ਕਹਿਯੋ ਨ ਮੋਰ ਕਾਜ ਹੈ ॥ ਮਿਖਯਾ ਇਹ ਤੋਹ ਸਾਜ ਹੈ ॥ कहियो न मोर काज है ॥ मिखया इह तोह साज है ॥ The Brahmin said that all those things were of no use to him and all the ostentations offered by the king were false.

ਅਢਾਇ ਪਾਵ ਭੂਮਿ ਦੈ ॥ ਬਸੇਖ ਪੂਰ ਕੀਰਤਿ ਲੈ ॥੭॥ अढाइ पाव भूमि दै ॥ बसेख पूर कीरति लै ॥७॥ He then asked him to give only two and a half steps of the earth; and accept the special eulogy.7.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਜਬ ਦਿਜ ਝਸ ਬਖਾਨੀ ਬਾਨੀ ॥ ਭੂਪਤਿ ਸਹਤ ਨ ਜਾਨਯੋ ਰਾਨੀ ॥ जब दिज झस बखानी बानी ॥ भूपति सहत न जानयो रानी ॥ When the Brahmin uttered these words, the king along with the queen could not understand its import.

ਪੈਰ ਅਢਾਇ ਭੂਮਿ ਦੇ ਕਹੀ ॥ ਦ੝ਰਿੜ ਕਰਿ ਬਾਤ ਦਿਜੋਤਮ ਗਹੀ ॥੮॥ पैर अढाइ भूमि दे कही ॥ दढ़रिड़ करि बात दिजोतम गही ॥८॥ That Brahmin again said the same thing with determination that he had asked only for two and a half steps of the earth.8.

ਦਿਜਬਰ ਸ੝ਕ੝ਰ ਹ੝ਤੋ ਨ੝ਰਿਪ ਤੀਰਾ ॥ ਜਾਨ ਗਯੋ ਸਭ ਭੇਦ੝ ਵਜੀਰਾ ॥ दिजबर सढ़कढ़र हढ़तो नढ़रिप तीरा ॥ जान गयो सभ भेदढ़ वजीरा ॥ Shukracharya, the preceptor of the king was with him at that time, and he alongwith all the ministers comprehended the mystery of asking only for earth.

ਜਿਯੋ ਜਿਯੋ ਦੇਨ ਪ੝ਰਿਥਵੀ ਨ੝ਰਿਪ ਕਹੈ ॥ ਤਿਮ੝ ਤਿਮ੝ ਨਾਹਿ ਪ੝ਰੋਹਿਤ੝ ਗਹੈ ॥੯॥ जियो जियो देन पढ़रिथवी नढ़रिप कहै ॥ तिमढ़ तिमढ़ नाहि पढ़रोहितढ़ गहै ॥९॥ As many times the king orders for the donation of the earth, for so many times the preceptor Shukracharya asks him not to agree to it.9.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਜਬ ਨ੝ਰਿਪ ਦੇਨ ਧਰਾ ਮਨ ਕੀਨਾ ॥ ਤਬ ਹੀ ਉੱਤ੝ਰ ਸ੝ਕ੝ਰ ਇਮ ਦੀਨਾ ॥ जब नढ़रिप देन धरा मन कीना ॥ तब ही उतढ़र सढ़कढ़र इम दीना ॥ But when the king made up his mind firmly to give the required earth as alms, then Shukracharya giving his reply said this to the king,

ਲਘ੝ ਦਿਜ ਯਾਹਿ ਨ ਭੂਪ ਪਛਾਨੋ ॥ ਬਿਸਨ੝ ਅਵਤਾਰ ਇਸੀ ਕਰਿ ਮਾਨੋ ॥੧੦॥ लघढ़ दिज याहि न भूप पछानो ॥ बिसनढ़ अवतार इसी करि मानो ॥१०॥ O king ! do not consider him a small-sized Brahmin, consider him only as an incarnation of Vishnu."10.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਸ੝ਨਤ ਬਚਨ ਦਾਨਵ ਸਭ ਹਸੇ ॥ ਉਚਰਤ ਸ੝ੱਕ੝ਰ ਕਹਾ ਘਰਿ ਬਸੇ ॥ सढ़नत बचन दानव सभ हसे ॥ उचरत सढ़ढ़कढ़र कहा घरि बसे ॥ Hearing this, all the demons laughed and said: "Shukracharya is only thinking of useless thing,

ਸਸਿਕ ਸਮਾਨ ਨ ਦਿਜ ਮਹਿ ਮਾਸਾ ॥ ਕਸ ਕਰ ਹੈ ਇਹ ਜੱਗ ਬਿਨਾਸਾ ॥੧੧॥ ससिक समान न दिज महि मासा ॥ कस कर है इह जढ़ग बिनासा ॥११॥ The Brahmin, whose body doth not contain the flesh more than a rabbit, how can he destroy the world?"11.

ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

ਸ੝ੱਕ੝ਰੋਬਾਚ ॥

Shukracharya said :

ਜਿਮ ਚਿਨਗਾਰੀ ਅਗਨਿ ਕੀ ਗਿਰਤ ਸਘਨ ਬਨ ਮਾਹਿ ॥ जिम चिनगारी अगनि की गिरत सघन बन माहि ॥ The manner in which only a spark of fire, falling down, grows immensely in stature;

ਅਧਿਕ ਤਨਿਕ ਤੇ ਹੋਤ ਹੈ ਤਿਮ ਦਿਜਬਰ ਨਰ ਨਾਹਿ ॥੧੨॥ अधिक तनिक ते होत है तिम दिजबर नर नाहि ॥१२॥ Likewise this small-sized Brahmin is not a man."12.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਹਸਿ ਭੂਪਤਿ ਇਹ ਬਾਤ ਬਖਾਨੀ ॥ ਸ੝ਨਹ੝ ਸ੝ੱਕ੝ਰ ਤ੝ਮ ਬਾਤ ਨਾ ਜਾਨੀ ॥ हसि भूपति इह बात बखानी ॥ सढ़नहढ़ सढ़ढ़कढ़र तढ़म बात ना जानी ॥ The king Bali, laughingly, said these words to Shukracharya: "O Shukracharya ! You are not comprehending it, I shall not regain such an occasion,

ਫ੝ਨਿ ਇਹ ਸਮੋ ਸਭੋ ਛਲ ਜੈਹੈ ॥ ਹਰਿ ਸੋ ਫੇਰਿ ਨ ਭਿੱਛਕ ਝਹੈ ॥੧੩॥ फढ़नि इह समो सभो छल जैहै ॥ हरि सो फेरि न भिढ़छक झहै ॥१३॥ Because I shall not be able to get such a God-like beggar again."13.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPI

ਮਨ ਮਹਿ ਬਾਤ ਇਹੈ ਠਹਿਰਾਈ ॥ ਮਨ ਮੋ ਧਰੀ ਨ ਕਿਸੂ ਬਤਾਈ ॥ मन महि बात इहै ठहिराई ॥ मन मो धरी न किसू बताई ॥ The King decided this general notion in his mind, but perceptibly he did not divulge it to anyone.

ਭ੝ਰਿਤ ਤੇ ਮਾਂਗ ਕਮੰਡਲ ਝਸਾ ॥ ਲਗਯੋ ਦਾਨ ਤਿਹ ਦੇਨ ਨਰੇਸਾ ॥੧੪॥ भढ़रित ते मांग कमंडल झसा ॥ लगयो दान तिह देन नरेसा ॥१४॥ He asked the medicant to give his pot, in order to enact such a base deed.14.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਸ੝ੱਕ੝ਰ ਬਾਤ ਮਨ ਮੋ ਪਹਿਚਾਨੀ ॥ ਭੇਦ ਨ ਲਹਤ ਭੂਪ ਅਗਿਆਨੀ ॥ सढ़ढ़कढ़र बात मन मो पहिचानी ॥ भेद न लहत भूप अगिआनी ॥ Shukracharya understood the notion of the mind of the King, but the ignorant King could not comprehend it.

ਧਾਰਿ ਮਕਰਿ ਕੇ ਜਾਰ ਸਰੂਪਾ ॥ ਪੈਠਿਯੋ ਮੱਧ ਕਮੰਡਲ ਭੂਪਾ ॥੧੫॥ धारि मकरि के जार सरूपा ॥ पैठियो मढ़ध कमंडल भूपा ॥१५॥ Shukracharya transformed himself into a small fish and seated himself in the mendicant`s pot.15.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਨ੝ਰਿਪਬਰ ਪਾਨਿ ਸ੝ਰਾਹੀ ਲਈ ॥ ਦਾਨ ਸਮੈ ਦਿਜਬਰ ਕੀ ਭਈ ॥ नढ़रिपबर पानि सढ़राही लई ॥ दान समै दिजबर की भई ॥ The King took the mendicant`s pot in his hand and the time forgiving alms to the Brahmin arrived.

ਦਾਨ ਹੇਤ ਜਬ ਹਾਥ ਚਲਾਯੋ ॥ ਨਿਕਸ ਨੀਰ ਕਰਿ ਤਾਹਿ ਨ ਆਯੋ ॥੧੬॥ दान हेत जब हाथ चलायो ॥ निकस नीर करि ताहि न आयो ॥१६॥ When the King in order to give alms took some water in his hand, no water came out of the pot.16.

ਤੋਮਰ ਛੰਦ ॥

TOMAR STANZA

ਚਮਕਯੋ ਤਬੈ ਦਿਜ ਰਾਜ ॥ ਕਰੀਝ ਨ੝ਰਿਪੇ ਸ੝ ਇਲਾਜ ॥ चमकयो तबै दिज राज ॥ करीझ नढ़रिपे सढ़ इलाज ॥ Then the Brahmin became furious and told the King to check up the por.

ਤਿਨਕਾ ਮਿਲੇ ਇਹ ਬੀਚ ॥ ਇਕ ਚੱਛ ਹ੝ਝ ਹੈ ਨੀਚ ॥੧੭॥ तिनका मिले इह बीच ॥ इक चढ़छ हढ़झ है नीच ॥१७॥ The pipe of the pot was searched with a straw and with this search one eye of Shukracharya was lost.17.

ਤੋਮਰ ॥

TOMAR STANZA

ਤ੝ਨਕਾ ਨ੝ਰਿਪਤ ਕਰ ਲੀਨ ॥ ਭੀਤਰ ਕਮੰਡਲ ਦੀਨ ॥ तढ़नका नढ़रिपत कर लीन ॥ भीतर कमंडल दीन ॥ The King took the straw in his hand and revolved it within the pot.

ਸ੝ੱਕ੝ਰ ਆਂਖ ਲਗੀਆ ਜਾਇ ॥ ਇਕ ਚੱਛ ਭਯੋ ਦਿਜ ਰਾਇ ॥੧੮॥ सढ़ढ़कढ़र आंख लगीआ जाइ ॥ इक चढ़छ भयो दिज राइ ॥१८॥ It pierced the eye of Shukrachraya and thus one eye of the preceptor Shukraccharya was lost.18.

ਤੋਮਰ ਛੰਦ ॥

TOMAR STNAZA

ਨੇਤ੝ਰ ਤੇ ਜ੝ ਗਿਰਿਯੋ ਨੀਰ ॥ ਸੋਈ ਲੀਯੋ ਕਰਿ ਦਿਜ ਬੀਰ ॥ नेतढ़र ते जढ़ गिरियो नीर ॥ सोई लीयो करि दिज बीर ॥ The water that oozed out from the eye of Shukracharya, the King took it in his hand.

ਕਰਿ ਨੀਰ ਚ੝ਵਨ ਨ ਦੀਨ ॥ ਇਮ ਸ੝ਵਾਮਿ ਕਾਰਜ ਕੀਨ ॥੧੯॥ करि नीर चढ़वन न दीन ॥ इम सढ़वामि कारज कीन ॥१९॥ Shukracharya did not allow the water to leak and in this way, tried to protect his master from destruction.19.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਚੱਛ ਨੀਰ ਕਰ ਭੀਤਰ ਪਰਾ ॥ ਵਹੈ ਸੰਕਲਪ ਦਿਜਹ ਕਰਿ ਧਰਾ ॥ चढ़छ नीर कर भीतर परा ॥ वहै संकलप दिजह करि धरा ॥ When the water (from the eye) oozed out on the hand of the King, he gave it as alms, notionally, on the hand of the Brahmin.

ਝਸ ਤਬੈ ਨਿਜ ਦੇਹ ਬਢਾਯੋ ॥ ਲੋਕ ਛੇਦ ਪਰਲੋਕ ਸਿਧਾਯੋ ॥੨੦॥ झस तबै निज देह बढायो ॥ लोक छेद परलोक सिधायो ॥२०॥ After this the dwarf expanded his body, which became so huge that it touched the heavens after penetrating through this world.20.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਨਿਰਖ ਲੋਗ ਅਦਭ੝ਤ ਬਿਸਮਝ ॥ ਦਾਨਵ ਪੇਖਿ ਮੂਰਛਨ ਭਝ ॥ निरख लोग अदभढ़त बिसमझ ॥ दानव पेखि मूरछन भझ ॥ Seeing this, al the people were wonder-struck and visualizing such a huge form of Vishnu, the demons became unconscious.

ਪਾਵ ਪਤਾਰ ਛ੝ਯੋ ਸਿਰ ਕਾਸਾ ॥ ਚਕ੝ਰਤ ਭਝ ਲਖਿ ਲੋਕ ਤਮਾਸਾ ॥੨੧॥ पाव पतार छढ़यो सिर कासा ॥ चकढ़रत भझ लखि लोक तमासा ॥२१॥ The feet of Vishnu touched the nether-worlds and the head touched the heavens; all were non-plussed on seeing this.21.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਝਕੈ ਪਾਵ ਪਤਾਰਹਿ ਛੂਆ ॥ ਦੂਸਰ ਪਾਵ ਗਗਨ ਲਉ ਹੂਆ ॥ झकै पाव पतारहि छूआ ॥ दूसर पाव गगन लउ हूआ ॥ With one step, he measured the nether-world and with the second step he measured the heavens.

ਭਿਦਿਯੋ ਅੰਡ ਬ੝ਰਹਮੰਡ ਅਪਾਰਾ ॥ ਤਿਹ ਤੇ ਗਿਰੀ ਗੰਗ ਕੀ ਧਾਰਾ ॥੨੨॥ भिदियो अंड बढ़रहमंड अपारा ॥ तिह ते गिरी गंग की धारा ॥२२॥ In this way, Vishnu touched the whole universe and the current of Ganges began to flow down from the whole universe.22.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਇਹ ਬਿਧਿ ਭੂਪ ਅਚੰਭਵ ਲਹਾ ॥ ਮਨ ਕ੝ਰਮ ਬਚਨ ਚਕ੝ਰਿਤ ਹ੝ਵੈ ਰਹਾ ॥ इह बिधि भूप अचढ़मभव लहा ॥ मन कढ़रम बचन चकढ़रित हढ़वै रहा ॥ In this way, the king was also astonished and remained puzzled in mind, word and deeds.

ਸ੝ ਕਛ੝ ਭਯੋ ਜੋਊ ਸ੝ਕ੝ਰ ਉਚਾਰਾ ॥ ਸੋ ਅਖੀਯਨ ਹਮ ਆਜ ਨਿਹਾਰਾ ॥੨੩॥ सढ़ कछढ़ भयो जोऊ सढ़कढ़र उचारा ॥ सो अखीयन हम आज निहारा ॥२३॥ Whatever Shukracharya had said, the same had happened and he himself had seen all this with his own eyes on that day.23.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਅਰਧਿ ਦੇਹਿ ਅਪਨੌ ਮਿਨਿ ਦੀਨਾ ॥ ਇਹ ਬਿਧਿ ਕੈ ਭੂਪਤਿ ਜਸ੝ ਲੀਨਾ ॥ अरधि देहि अपनौ मिनि दीना ॥ इह बिधि कै भूपति जसढ़ लीना ॥ For the remaining half a step, the king Bali got measured his own body and earned approbation.

ਜਬ ਲਉ ਗੰਗ ਜਮਨ ਕੋ ਨੀਰਾ ॥ ਤਬ ਲਉ ਚਲੀ ਕਥਾ ਜਗਿ ਧੀਰਾ ॥੨੪॥ जब लउ गंग जमन को नीरा ॥ तब लउ चली कथा जगि धीरा ॥२४॥ As long as there is water in the Ganges and Yamuna, till that time the story of his time the story of this enduring king will be narrated.24.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਬਿਸਨ ਪ੝ਰਸੰਨਿ ਪ੝ਰਤੱਛ ਹ੝ਵੈ ਕਹਾ ॥ ਚੋਬਦਾਰ੝ ਦ੝ਆਰੇ ਹ੝ਵੈ ਰਹਾ ॥ बिसन पढ़रसंनि पढ़रतढ़छ हढ़वै कहा ॥ चोबदारढ़ दढ़आरे हढ़वै रहा ॥ Vishnu was then pleased and manifesting himself said; "O king; I shall be a watchmen and servant at your gate myself;

ਕਹਿਯੋ ਚਲੇ ਤਬ ਲਗੈ ਕਹਾਨੀ ॥ ਜਬ ਲਗ ਗੰਗ ਜਮ੝ਨ ਕੋ ਪਾਨੀ ॥੨੫॥ कहियो चले तब लगै कहानी ॥ जब लग गंग जमढ़न को पानी ॥२५॥ And as long as there will be water in the Ganges and Yamuna, the story of your charity will be narrate.25.

ਦੋਹਰਾ ॥

DOHRA

ਜਹ ਸਾਧਨ ਸੰਕਟ ਪਰੈ ਤੱਹ ਤੱਹ ਭਝ ਸਹਾਇ ॥ जह साधन संकट परै तढ़ह तढ़ह भझ सहाइ ॥ Wherever the saints are in distress, the Non-temporal Lord comes there for help.

ਦ੝ਆਰਪਾਲ ਹ੝ਵੈ ਦਰ ਬਸੇ ਭਗਤ ਹੇਤ ਹਰਿ ਰਾਇ ॥੨੬॥ दढ़आरपाल हढ़वै दर बसे भगत हेत हरि राइ ॥२६॥ The Lord, coming under the control of His devotee, became his gate-keeper.26.

ਚੌਪਈ ॥

CHAUPAI

ਅਸਟਮ ਅਵਤਾਰ ਬਿਸਨ ਅਸ ਧਰਾ ॥ ਸਾਧਨ ਸਭੈ ਕ੝ਰਿਤਾਰਥ ਕਰਾ ॥ असटम अवतार बिसन अस धरा ॥ साधन सभै कढ़रितारथ करा ॥ In this way, Vishnu, manifesting himself as the eighth incarnation, gratified all the saints.

ਅਬ ਨਵਮੋਂ ਬਰਨੋ ਅਵਤਾਰਾ ॥ ਸ੝ਨਹ੝ ਸੰਤ ਚਿਤ ਲਾਇ ਸ੝ਧਾਰਾ ॥੨੭॥ अब नवमों बरनो अवतारा ॥ सढ़नहढ़ संत चित लाइ सढ़धारा ॥२७॥ Now I describe the ninth incarnation, which may please be listened to and understood correctly by all the saints..27.

ਇਤਿ ਸ੝ਰੀ ਬਚਿਤ੝ਰ ਨਾਟਕ ਗ੝ਰੰਥੇ ਬਾਵਨ ਅਵਤਾਰ ਅਸਟਮੋ ਕਥਨੰ ॥੮॥ ਬਲ ਛਲਨ ਸਮਾਪਤਮ ਸਤ ॥ इति सढ़री बचितढ़र नाटक गढ़रंथे बावन अवतार असटमो कथनं ॥८॥ बल छलन समापतम सत ॥ End of the description of VAMAN, the eighth incarnation of Vishnu and the deception of the king BALI in BACHITTAR NATAK.8.


Ath Chobis Avtar Kathan

Commencement of Composition
1. Mach Avtar | 2. Kach Avtar | 3. Nar Avtar | 4. Narain Avtar | 5. Maha Mohini | 6. Bairah Avtar | 7. Narsingh Avtar | 8. Bavan Avtar | 9. Parasram Avtar | 10. Brahma Avtar | 11.Rudra Avtar | 12.Jalandhar Avtar | 13.Bisan Avtar | 14.Bisan Avtar to kill Madhu Kaitab | 15. Arihant Dev Avtar | 16. Manu Raja Avtar | 17.Dhanantar Vaid | 18.Suraj Avtar | 19. Chandra Avtar | 20. Ram Avtar | 21. Krishna Avtar | 22. Nar Avtar | 23. Baudh Avtar | 24. Nihkalanki Avtar